डॉ. विश्वजित् बर्मन. “भारतीय जीवनदर्शन में पुरुषार्थ-चतुष्टय और वर्तमान समाज में उसका महत्व”. Sampreshan, ISSN:2347-2979 UGC CARE Group 1, vol. 15, no. 4, Nov. 2025, pp. 95-108, doi:10.8476/sampreshan.v15i4.444.